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Sunday, 17 September 2017

मगर शुभचिंतकों की खुद, करो पहचान तुम प्यारे


बहस माता-पिता गुरु से, नहीं करता कभी रविकर ।
अवज्ञा भी नहीं करता, सुने फटकार भी हँसकर।
कभी भी मूर्ख पागल से नहीं तकरार करता पर-
सुनो हक छीनने वालों, करे संघर्ष बढ़-चढ़ कर।।


किसी की राय से राही पकड़ ले पथ सही रविकर।

मगर मंज़िल नही मिलती, बिना मेहनत किए डटकर।
तुम्हें पहचानते बेशक प्रशंसक, तो बहुत सारे
मगर शुभचिंतकों की खुद, करो पहचान तुम प्यारे।।



Friday, 25 August 2017

तलाक

जो जंग जीती औरतों ने आज भी आधी-अधूरी ।
नाराज हो जाये मियाँ तो आज भी है छूट पूरी।
शादी करेगा दूसरी फिर तीसरी चौथी करेगा।
पत्नी उपेक्षा से मरेगी वह नही होगी जरूरी।

पड़ी जब आँख पर पट्टी, निभाती न्याय की देवी।
तराजू ले सदी चौदह, बिताती न्याय की देवी।
मगर जब देवियाँ जागीं, मिला अधिकार तब वाजिब
विषम् पासंग पलड़े का, मिटाती न्याय की देवी।


संगीत से इलाज-

सुना दो राग दरबारी हृदय आघात टल जाये।
अनिद्रा दूर हो जाए अगर तू भैरवी गाये।
हुआ सिरदर्द कुछ ज्यादा सुना दो राग भैरव तुम
मगर अवसाद में तो राग मधुवंती बहुत भाये।

विहागी राग गा लेना अगर वैराग्य आये तो।
अजी मल्हार गा लेना गरम ऋतु जो सताये तो।
जलाया राग दीपक से दिया संगीत कारों ने।
चलो शिवरंजनी गाओ अगर विद्या भुलाये तो।

ललित से अस्थमा थमता पुराने गीत कुछ गाओ।
हुआ कमजोर तन तो राग जयवंती सुना जाओ।
बढ़े एसीडिटी जब भी खमाजी राग भाता है
करें संगीत भी उपचार प्रिय नजदीक तो आओ।।

जंगली पॉलिटिक्स

सरासर झूठ सुन उसका उसे कौआ नहीं काटा।
चपाती बिल्लियों को चंट बंदर ठीक से बाँटा।

परस्पर लोमड़ी बगुला निभाते मेजबानी जब।
घड़े में खीर यह खाया उधर वह थाल भी चाटा।

युगों से साथ गेंहूँ के सदा पिसता रहा जो घुन 
बनाया दोस्त चावल को नहीं जिसका बने आटा।।

मरा हीरा कटा मोती किसानों की बिकी खेती
खिला पीजा खिला बर्गर भरे फिर कार फर्राटा।

कभी खरगोश कछुवे को नहीं कमजोर समझा था
करा के मैच फिक्सिंग वो करेगा पूर्ण फिर घाटा।।

कुएं तक सिंह तो आया मगर झांका नही अन्दर
बुला खरगोश को रविकर अकेले में बहुत डाटा।।

Tuesday, 22 August 2017

चले यह जिंदगी लेकर हमेशा शाम तक रिश्ते-

कहीं बेनाम हैं रिश्ते, कहीं बस नाम के रिश्ते।
चतुर मानुष बनाते हैं हमेशा काम से रिश्ते।

मुहब्बत मुफ्त में मिलती सदा माँ बाप से लेकिन
लगाये दाम की पर्ची धरे गोदाम में रिश्ते।

शुरू विश्वास से होते समय करता इन्हे पक्का
अगर धोखा दिया इनको गये फिर काम से रिश्ते।।

रहो चुपचाप गलती पर, बहस बिल्कुल नही करना
खतम नाराजगी हो तो चले आराम से रिश्ते।।

बड़ा भारी लगे मतलब, निकलते ही किया हलका
कई मन के रहे थे जो बचे दो ग्राम के रिश्ते।

कभी भी जिंदगी के साथ रिश्ते चल नही पाते
चले यह जिंदगी लेकर हमेशा शाम तक रिश्ते।।

पड़ी हैं स्वार्थ में दुनिया नहीं वे याद करते हैं
पड़े जब काम तो भेजें इधर पैग़ाम वे रिश्ते।।

रवैया मूढ़ता उनकी अहम् उनका पड़े भारी
नहीं वे रख सके रविकर हमेशा थाम के रिश्ते।।

Sunday, 13 August 2017

हथियार के सौदागरों यूँ खून तुम पीते रहो।

ग्राहक तुम्हें मिलते रहें, हर मौत के सामान के ।
व्यापार खुब फूले फले संग्राम बर्बर ठान के।
जब जर जमीं जोरू सरीखे मंद कारक हो गये।
तब युद्ध छेड़े जाति के कुछ धर्म के कुछ आन के।
विध्वंश हो होता रहे नुकसान मत रविकर सहो।।
हथियार के सौदागरों यूँ खून तुम पीते रहो।।

आदेश दे उपदेश दे हर देश का शासक सदा।
जनता भरे सैनिक मरे परिवार भोगे आपदा।
दुल्हन नई नवजात भी करता प्रतीक्षा अनवरत्
करते रहेंगे जिन्दगी भर युद्ध की कीमत अदा।
दस लाख देकर धन्य है इस देश का शासक अहो।
हथियार के सौदागरों यूँ खून तुम पीते रहो।।

प्रतीक्षा हो रही लम्बी, भुलाओ मत चले आओ-

अजी अब देर क्यों करते, चले आओ चले आओ।
प्रतीक्षा हो रही लम्बी, भुलाओ मत चले आओ।।

यहाँ तू शर्तिया आये,खबर सुन मौत की मेरी।
दुखी जब सब सुजन मेरे, सुनें वे सांत्वना तेरी।
नहीं मैं सुन सकूँगा तब, अभी आके सुना जाओ।
अजी अब देर क्यों करते, चले आओ चले आओ।

करोगे माफ मरने पर, हमारे पाप तुम सारे ।
करोगे कद्र भी मेरी, पड़ा निर्जीव जब द्वारे।
नहीं मैं देख पाऊँगा, यही तुम आज दिखलाओ।
अजी अब देर क्यों करते, चले आओ चले आओ।

अभी कुछ व्यस्त ज्यादा हो, तुम्हें फुरसत नहीं मिलती ।
कहोगे व्यक्ति उम्दा था, मगर तब देह ना हिलती।
घरी भर साथ बैठो तुम, नही यूँ आज इतराओ।
अजी अब देर क्यों करते, चले आओ चले आओ।